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पूर्वी चम्पारण के मेहसी में हर दिन हो रहा है हजारों रुपये का पान नुकसान।


पान की खेती करने वाले किसान को झेलनी पड़ रही है लॉकडाउन की मार। 
मेहसी प्रखंड के तारापाकड गांव में सैकड़ों ऐसे परिवार है जो पान की खेती पर निर्भर है।
 और उसी से करते हैं अपना भरन पोषण। 
पान की खेती कर रहे किसानों को लॉकडाउन के कारण आर्थिक तंगी से जूझना पड़ रहा है। पान नहीं बिकने के कारण रोजाना हजारों रुपये का नुकसान हो रहा है। किसान बताते हैं कि पान के पौधे में लगी अच्छी फसल नहीं तोड़ने के कारण सूखने के करार पर है पान के पत्ते। 
। जिससे उन्हें भारी आर्थिक क्षति हो रहीं है। किसान कहते हैं कि आखिर वे पान बेचें तो कहां बेचें, कोई थोक विक्रेता लेने को तैयार नहीं है।
मीठा पत्ता पान की खेती करने वाले मेहसी प्रखंड के किसान सत्य नारायण प्रसाद चौरसिया कहते हैं कि लॉकडाउन के बाद से अभी रोजाना हजारों रुपये का नुकसान हो रहा है।
 पौधे में लगे अच्छे मीठे पान भी सूखने के करार पर हैं।

पान की खेती करने वाले सैकड़ो परिवार प्रतिदिन इस व्यवसाय से जुड़े है जो बड़े पैमाने पर पान की खेती करते हैं लेकिन अब पान का पता खराब होने लगा है । अगर हम रोज पान नहीं तोड़ते हैं तो पत्ते पीले होकर खुद जमीन पर गिर जाते हैं। जिससे मेहनत व लागत मूल्य को अपनी आंखों के सामने बर्बाद होते देखते हैं।
उन्होंने कहा की लॉकडाउन के कारण यह व्यापार अभी रुका हुआ है। इससे हमें पान बेचने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि लाॅकडाउन खत्म होने पर हम लोगों को सरकार कुछ मदद करें जिससे हम लोगों का जीवन बसर अच्छा से हो सके। 

मोतिहारी से अजीत कुमार की रिपोर्ट

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