सनपुर पलवल (मुकेश वशिष्ट) :- सिविल सर्जन डॉ ब्रह्मदीप ने कहा कि कोरोना वायरस (कोविड-19) महामारी के रूप में हाल ही में सामने आया है।
इसके संचरण का मार्ग पूरी तरह से ज्ञात नहीं है, हालांकि यह ज्ञात है कि यह संक्रमण एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है। उन्होंने बताया कि इस प्रकार की महामारियों में अक्सर बीमारी के बारे में गलत धारणाएं और गलत सूचना तेजी से फैलती है। पिछली महामारियों में मानसिक स्वास्थ्य और मनोसामाजिक समर्थन (एमएचपीएसएस) को एक प्रमुख प्राथमिकता के रूप में पहचाना गया है।
कोविड-19 के प्रकोप में फैलने वाली कुछ अफवाहें हैं जैसे कि यह वायरस एंटीबायोटिक्स, सिगरेट, शराब के उपयोग से कोविड-19 को मारा जा सकता है, दूषित खाद्य पदार्थ द्वारा यह वायरस फैल सकता है, कई शरारती तत्व जानबूझकर वायरस फैलाना चाहते हैं आदि इस तरह की अफवाहें न केवल शारीरिक रूप से प्रभावित करती हैं बल्कि हमारे मानसिक स्वास्थ्य को भी बहुत प्रभावित करती हैं।
महामारी में बीमार होने का डर, जान जाने का भय, आजीविका खोने का डर, अपनों को खोजाने का भय और कोरोना वायरस से इन्फेक्शन होने के कारण अपनी नौकरी से निकाल दिए जाने का डर इत्यादि अलग-थलग होने के कारण असहायता और अवसाद की भावना उत्पन्न होने के कारण इंसान का मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित हो जाता है। यह सभी भयभीत करने वाली अफवाहों और गलत सूचनाएं सीधे व्यक्ति के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करती हैं। इसलिए हमें अपने मानसिक स्वास्थ्य को स्वस्थ रखने की आवश्यकता सबसे अधिक है। हमें प्रत्येक समय अपना ख्याल रखना चाहिए और काम के दौरान पर्याप्त आराम करना चाहिए। मनुष्य स्वस्थ भोजन खाए, शारीरिक गतिविधि में संलग्न हों और परिवार तथा दोस्तों के संपर्क में रहें।
डॉ. ब्रह्मदीप ने बताया कि हमें तम्बाकू, शराब या अन्य नशीली दवाओं के उपयोग जैसी अदम्य रणनीतियों का उपयोग करने से बचना चाहिए। लंबी अवधि तक इनका सेवन आपकी मानसिक और शारीरिक सेहत को खराब कर सकता है। तनाव के समय में अपनी जरूरतों और भावनाओं पर ध्यान दें। स्वस्थ गतिविधियों में व्यस्त रहें जो आपको आनंद देती हैं और आराम प्रदान करती हैं। नियमित रूप से व्यायाम करें, पूरी नींद लें और स्वस्थ भोजन खाएं। यह वास्तव में हम सभी के लिए एक उच्च जोखिम भरा समय है। खासकर उन व्यक्तियों के लिए जो अपने जीवन में भारी व्यवधान का सामना करते हैं।
लोगों को चिंता और भय का अनुभव होने की संभावना है तथा इसमें उन प्रकार के भय शामिल हो सकते हैं जो वयस्कों द्वारा अनुभव किए जाने वाले है जैसे कि मरने का डर, रिश्तेदारों के खोने का डर, चिकित्सा उपचार प्राप्त करने से डरना आदि। स्वास्थ्य पेशेवरों और डब्ल्यूएचओ की वेबसाइट से दिन के दौरान विशिष्ट समय पर सूचना अपडेट और व्यावहारिक मार्गदर्शन प्राप्त करते रहें। अफवाहों पर ध्यान न दें व उनका पालन करने से बचें क्योंकि इससे आप असहज महसूस करेगें।
डा. ब्रह्मदीप ने बताया कि सिविल अस्पताल पलवल सभी को पूर्ण मनो-वैज्ञानिक सहायता प्रदान करता है। उन्होंने यह भी बताया कि जिला पलवल में हमारे पास राज्य हेल्पलाइन 1075 पर 24*7 टेली काउंसलिंग सेवाएं हैं तथा जिला हेल्पलाइन नंबर -01275240022, 7027840481 उपलब्ध हैं। मनोचिकित्सा परामर्श सत्र और दवा भी दैनिक ओपीडी में उपलब्ध हैं। क्वारंटाइन सेंटर और आइसोलेसन सेंटर में एडमिट सभी लोग को फोन पर स्वास्थ्य विभाग द्वारा सायकोसोशल काउंसलिंग की जाती है।
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